उधम सिंह नगर जनपद के ग्राम पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या का मामला अब केवल एक मौत की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीति,बयानबाज़ी, दबाव और कथित साजिश के आरोपों के बीच उलझता जा रहा है.. प्रकरण में हर नए घटनाक्रम के साथ सवाल और गहरे होते जा रहे हैं..
मृतक का परिवार एक ओर मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा कराई जा रही जांच पर भरोसा जता रहा है, वहीं दूसरी ओर परिवार के सदस्यों, खासकर सुखवंत सिंह की पत्नी के बयान बार-बार बदलते नजर आ रहे हैं.. हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन इसके बाद सामने आए दूसरे बयान में उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें भड़काकर और बहला-फुसलाकर कैमरे के सामने बयान दिलवा रहे हैं…
सुखवंत सिंह की पत्नी ने यह भी स्वीकार किया कि वह मानसिक तनाव और डिप्रेशन की स्थिति में हैं, इसके बावजूद कुछ लोग जानबूझकर उनके बयान रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं.. उन्होंने स्पष्ट अपील की है कि उनसे किसी प्रकार की बातचीत या बयान न लिया जाए..साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार द्वारा कराई जा रही जांच और एसएसपी मणिकांत मिश्रा पर पूरा भरोसा है..
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर परिवार को प्रभावित कौन कर रहा है और किसके इशारे पर बयान बदलवाए जा रहे हैं..मामले में एक और गंभीर पहलू यह भी सामने आ रहा है कि सुखवंत सिंह को आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने के लिए किसने मजबूर किया.. वायरल वीडियो मै आत्महत्या से पहले उन्होंने करीब दो दर्जन लोगों के नाम लिए थे, जिनमें कथित रूप से पैसे के लेन-देन से जुड़े लोग, साथ ही जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक के नाम शामिल बताए जा रहे हैं..
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि सुखवंत सिंह स्वभाव से आत्महत्या करने वाला व्यक्ति नहीं था.. उनका मानना है कि इस पूरे मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने की भूमिका की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए…
उल्लेखनीय है कि घटना से एक दिन पहले काशीपुर में आयोजित जनता दरबार में एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने इस पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए थे और पीड़ित परिवार को निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया था..एसएसपी ने स्पष्ट किया था कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी..
इस बीच एक पक्ष पुलिस पर पैसे लेने जैसे आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष पहले ही पुलिस को उच्च न्यायालय में पार्टी बना चुका है.. ऐसे में सवाल उठता है कि यदि पुलिस पैसे लेकर एकतरफा कार्यवाही कर रही होती तो उसे न्यायालय में पक्षकार क्यों बनाया गया..

हम आपको बता दे की आईपीएस मणिकांत मिश्रा की गिनती सख्त कार्यशाली वाले पुलिस अधिकारिओ मै होती हैं, जब से उधमसिंहनगर जिले में इनकी तैनाती हुई हैं तब से अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई देखने को मिली है जिसे तमाम लोगों और व्यापारियों ने भी पुलिस क़े काम को खुलकर सोशल मीडिया पर खूब सराहा है ..सीएम धामी क़े नशा मुक्त उत्तराखंड विज़न को आगे बढ़ाते हुए अवैध नशा तस्करी और बदमाशों के खिलाफ चलाए गए अभियानों, विशेषकर ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ के तहत, बीते 15 महीनों में रिकॉर्ड संख्या में कार्रवाई हुई है, जिसके चलते अबतक नशा तस्कर और गुंडई करने वाले 36 लोगों को एनकाउंटर में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया जिससे प्रदेश और जिले में कानून व्यवस्था दुरुस्त हुई है, पुलिस की सक्रियता और प्रभाव बढ़ा है.. इसके बावजूद सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले को लेकर विपक्ष और कुछ संगठन द्वारा सीएम और पुलिस प्रशासन को घेरने मै लगा हुआ हैं…
प्रकरण में सीधे एसएसपी का नाम जोड़ा जाना जांच को और संवेदनशील बन रहा है.. इसे एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुखवंत सिंह को आत्महत्या की ओर धकेलने वाले असल चेहरे कौन हैं.. मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच क़े लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने महत्वपूर्ण मजिस्ट्रेट जांच हेतु कुमाऊं कमिश्नर आईएएस दीपक रावत को नियुक्त किया है, वहीं पुलिस की हाई लेवल जांच (SIT) जांच के लिए तेज तर्रार आईपीएस नीलेश आनंद भरणे को नामित किया है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।



